Hindi Poetry – दिल छू लेने वाली बेहतरीन कविताएं
Table of Contents
- Love Poetry in Hindi — मोहब्बत की चुनिंदा कविताएँ
- Sad Poetry in Hindi — दर्द भरी कविताएँ
- Hindi Poetry on Life — ज़िंदगी पर कविताएँ
- Romantic Poetry in Hindi — रोमांटिक कविताएँ
- ज़िंदगी पर बेहतरीन पंक्तियाँ
- Heart Touching Poetry in Hindi — दिल छू लेने वाली कविताएँ
- Sad Life Poetry in Hindi — ज़िंदगी के दर्द पर कविताएँ
- प्रसिद्ध हिंदी कविताएँ — Famous Poems
- Breakup Poetry in Hindi — टूटे रिश्ते पर कविताएँ
- हिंदी कविता इमेज — डाउनलोड और शेयर करें
- विदाई और याद पर कविताएँ
- Short poetry in Hindi
- नारी पर कविता — Women Poetry in Hindi
- One Sided Love Poetry in Hindi — एकतरफ़ा प्यार
- Sad Love Poetry in Hindi — अधूरी मोहब्बत
- Best Hindi Poetry Lines — बेहतरीन पंक्तियाँ
- Motivational Poetry in Hindi — प्रेरणादायक कविताएँ
- काश,जिंदगी सचमुच किताब होती
- अचानक ज़िन्दगी में कभी
- कुछ ऐसा कर जाओ – हिंदी कविता
- एक उम्र
- कुछ कहना था, तुने सुना ही नहीं।
- कोई महफ़िल नहीं है, कोई यार नहीं है
- बची हर सांस गिनता हूँ, तेरी साँसों में ठहरा हूँ
- किसी का सहारा ना बन के
- एहसास चेहरे पे थी प्यारी सी मुस्कुराहट मासूमियत से आबाद साज जब देखा उसे मैं पहली बार तब हुआ मुझे ये एहसास…
- समन्दर का पानी शराब होता तो सोचो कितना बवाल होता
- कभी लगता है इस जिन्दगी में
- तू जिंदगी को जी
- जब तक चलेगी जिंदगी
- अजीब सी कशमकश है
- Mother's Day Poetry in Hindi — माँ पर कविताएँ
- रिश्ते और ज़िंदगी पर कविताएँ — Life & Relationships
- आख़िर में
हिंदी कविता में वो ताकत है जो दो लाइनों में पूरी ज़िंदगी कह देती है। इस पेज पर आपको एक ही जगह बेहतरीन hindi poetry मिलेगी — ज़िंदगी के सबक सिखाने वाली, दिल को सुकून देने वाली, और कभी-कभी आँख नम कर देने वाली।
नीचे ग़ालिब, गुलज़ार और जॉन एलिया जैसे मशहूर कवियों की चुनिंदा रचनाओं से लेकर छोटी best hindi poetry lines और दर्द भरी sad poetry in hindi तक — सब कुछ करीने से रखा है। कोई भी पंक्ति पढ़ने और शेयर करने में बस कुछ सेकंड लगते हैं।
कविता सिर्फ़ शब्द नहीं होती। एक अच्छी लाइन किसी का पूरा दिन बदल सकती है। चलिए, शुरू करते हैं।
Love Poetry in Hindi — मोहब्बत की चुनिंदा कविताएँ
प्यार वो एहसास है जिसे हर कोई महसूस करता है, पर हर कोई कह नहीं पाता। और जब लफ़्ज़ साथ छोड़ देते हैं, तभी love poetry in hindi काम आती है।
कोई अधूरी मोहब्बत का दर्द बयां करता है, कोई पहली नज़र वाला इश्क़, तो कोई सालों पुराने रिश्ते की मिठास। एक अच्छी प्रेम कविता यही करती है — दिल की बात, जो आप नहीं कह पाते, वो कह देती है।
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थोड़ी खामोशी रखो और रिश्तों को कहने दो

थोड़ी खामोशी रखो और रिश्तों को कहने दो
ना बांधों ना बँधो, निश्छल स्वरूप में बस बहने दो!प्यार है सच्चा, तो भरोशा भी पक्का ही रखो
बढ़ने दो उम्र को, दिल को हमेशा बच्चा ही रखो!थोड़ी सी नोक झोंक तो रिश्तों में जरुरी है बहुत
प्यार का रंग गहरा और शिकवों का हल्का ही रखो!जो रूठ जाये कोई, तो मना लो करके प्यार की बातें
रिश्तों में परवा जरुरी है बहुत,
इस बात का हमेशा एहसास रखो!प्यार में अक्सर,
आप से तुम, तुम से तू होना लाज़मी है बहुत
खूबसूरत रहेगा रिश्ता हमेशा
बस एक दूसरे के बिचारों का, दिल से सम्मान रखो!
शाम की तरह हम ढलते जा रहे है - हिंदी कविता

शाम की तरह हम ढलते जा रहे है,
बिना किसी मंजिल के चलते जा रहे है।
लम्हे जो सम्हाल के रखे थे जीने के लिये ,
वो खर्च किये बिना ही पिघलते जा रहे है।धुये की तरह विखर गयी जिन्दगी मेरी हवाओ मैं,
बचे हुये लम्हे सिगरेट की तरह जलते जा रहे है।
जो मिल गया उसी का हाथ थाम लिया,
हम कपडो की तरह हमसफर बदलते जा रहे है।
तेरी खुशबू को ढूंढोगे कहां
यह शायद गुम हो गई कहीं
हंसती खेलती सारी खुशियां
ना जाने कहां यह दौड़ गई !वैसे तो अब तक महक रही
कुछ निर्मल कोमल साधारण
अब गुमशुदा से गुमशुदा हुई
जाने ना कोई क्या कारण !शायद कोई खुशबू चुरा रहा
जो सिंचित फूल किया तुमने
कोई पल पल उसको तोड़ रहा
क्यों ना आभास किया तुमनेअब मुरझाकर कश खा जाए
कुछ ऐसी हालात होती है
बेखबर वह खुद से हो जाए
ना अब हंसती ना रोती है!
तेरा हाथ मेरे हाथों में रह जाए
तो अच्छा है, ये जीवन यूँ ही साथ गुजर जाए
तो अच्छा है ! सबको पता है की मेरी
गजल हो तुम, पर ये खबर तुम तक पहुंच जाए
तो अच्छा है ! की चल रहा है दिल मेरा
बहके हुए शराबी सा, बस अब ये तुम्हारे ही पास
रह जाए तो अच्छा है ! की तेरा हाथ मेरे हाथों में रह जाए
तो अच्छा है !
दिलों की बातें क्या कहूँ तुम बिन बोले ही समझो कभी !!

दिलों की बातें क्या कहूँ
तुम बिन बोले ही समझो कभी !!मैं ही हमेशा क्यों कहु
बातें तुम भी कहदो कभी !!हमेशा मैं ही क्यों मनाऊ
तुम भी मुझे मनाओ कभी !!जो रूठ जाऊ तुमसे तो
तुम भी हक़ जताओ कभी!!जो गलत करू मै तो
तुम भी मुझे समझाओ कभी!!नोक-झोक तो चलती रहेगी
पर छोड़ के ना जाओ कभी!!
Sad Poetry in Hindi — दर्द भरी कविताएँ
कुछ बातें आँसू नहीं, लफ़्ज़ माँगती हैं। टूटा रिश्ता, बेवफ़ाई, या वो तन्हाई जो भीड़ में भी पीछा नहीं छोड़ती — sad poetry in hindi इन्हीं एहसासों को ज़ुबान देती है।
ये शायरी पढ़कर अक्सर एक अजीब सुकून मिलता है। पता चलता है कि जो आप महसूस कर रहे हैं, वो किसी और ने भी झेला है, और शब्दों में उतार दिया है। आप अकेले नहीं हैं।
उसकी अहमियत बताना भी ज़रूरी है – हिंदी कविता

उसकी अहमियत है क्या, बताना भी ज़रूरी है !
है उससे इश्क़ अग़र तो जताना भी ज़रूरी है !!अब काम लफ़्फ़ाज़ी से तुम कब तक चलाओगे !
उसकी झील सी आंखों में डूब जाना भी ज़रूरी है !!दिल के ज़ज़्बात तुम दिल मे दबा कर मत रखो !
उसको देख कर प्यार से मुस्कुराना भी ज़रूरी है !!उसे ये बारहा कहना वो कितना ख़ूबसूरत है !
उसे नग्मे मोहब्बत के सुनाना भी ज़रूरी है !!किसी भी हाल में तुम छोड़ना हाथ मत उसका !
किया है इश्क़ गर तुमने, निभाना भी ज़रूरी है !!सहर अब रूठना तो इश्क़ में है लाज़मी लेकिन !
कभी महबूब गर रूठे तो मनाना भी ज़रूरी है !!
😊🌹✍️
जिंदगी की इस आपाधापी में,
कब जिंदगी की सुबह से शाम हो गई,
पता ही नहीं चला।कल तक जिन मैदानों में खेला करते थे,
आज वो मैदान नीलाम हो गए,
पता ही नहीं चला।कब सपनों के लिए,
सपनों का घर छोड़ दिया पता ही नहीं चला।
रूह आज भी बचपन में अटकी,
बस शरीर जवान हो गया।गांव से चला था,
कब शहर आ गया पता ही नहीं चला।
पैदल दौड़ने वाला बच्चा कब,
बाइक, कार चलाने लगा हूं पता ही नहीं चला।
जिंदगी की हर सांस जीने वाला,
कब जिंदगी जीना भूल गया, पता ही नहीं चला।
सो रहा था मां की गोद में चैन की नींद,
कब नींद उड़ गई पता ही नहीं चला।एक जमाना जब दोस्तों के साथ,
खूब हंसी ठिठोली किया करते थे,
अब कहां खो गए पता नहीं।जिम्मेदारी के बोझ ने कब जिम्मेदार,
बना दिया , पता ही नहीं चला।पूरे परिवार के साथ रहने वाले,
कब अकेले हो गए, पता ही नहीं चला।मीलों का सफर कब तय कर लिया,
जिंदगी का सफर कब रुक गया,
पता ही नहीं चला।
Hindi Poetry on Life — ज़िंदगी पर कविताएँ
ज़िंदगी सीधी लाइन में नहीं चलती। कभी सब कुछ सही, कभी एक ही झटके में सब उलट। और इसी उतार-चढ़ाव में सबसे गहरी hindi poetry on life जन्म लेती है।
कोई कविता हारे हुए दिन में हौसला देती है। कोई आईना दिखाती है — वो बात कह जाती है जो हम खुद से भी नहीं कहते। यही इन पंक्तियों की ताकत है: पढ़ते-पढ़ते आप थोड़ा रुक कर सोचने लगते हैं।
गुजार दिये होंगे तुमने

कई दिन,महीने,साल…
जो काट न सकोगे वो एक_रात "मैं" हूँ..,,की होगी गुफ्तगू,
तुमने कई दफा, कई लोगों से…दिल पर जो लगेगी वो एक_बात "मैं" हूँ..,,
भीड़ में जब तन्हा
खुद को तुम पाओगे…अपनेपन का एहसास जो करा दे
वो एक_साथ "मैं " हूँ..,
बिताये होंगे तुमने
कई हसीन_पल सबके साथ में…जो भुला नही पाओगे,वो एक_याद "मैं" हूँ..,,
आज भी ख़याल तेरा सोने नहीं देता
आज भी मुझे किसी का होने नहीं देता!आंखों में आंसू लिए देखूं तेरी फोटो पर
तेरा हंसता चेहरा मुझे रोने नहीं देता!काश धुँए की तरह तेरी यादों में उड़ जाऊं
हस्ती मिटा कर खुद की तुझ से जुड़ जाऊं!एक बार अपनी बाहों में सुला तो सही
झूठा ही मगर प्यार दिखा तो सही!पहले वो एक तुम्हारी तस्वीर बटुए में रहती थी
अब मेरे स्मार्टफोन में तुम्हारे सिवा कोई नहीं हैपहले वो तुम्हारी यादें, मुलाकातें दिलों में छपती थी
अब मेरे फोन की मेमोरी कार्ड में बसती हैं !पहले रहता था तेरे खत का इंतजार
अब तो बस चैटिंग से होने लगा है प्यार !
Romantic Poetry in Hindi — रोमांटिक कविताएँ
कुछ लफ़्ज़ ऐसे होते हैं जो किसी ख़ास के लिए ही बने होते हैं। पहली मुलाक़ात की घबराहट, साथ बिताए लम्हे, या बस उन्हें ये बताना कि वो कितने मायने रखते हैं — romantic poetry in hindi यही सब कहती है।
ये शायरी इज़हार का सबसे आसान तरीका है। मैसेज में भेज दो, या किसी ख़ास मौके पर सुना दो — एक अच्छी लाइन वो काम कर जाती है जो लंबी बातें नहीं कर पातीं।

मेरे जिस्म की रूह हो तुम
बेखयाली में भी खयाल हो तुम,नींद में सपने हो तुम
गैरों में अपने हो तुम,दिल की धड़कन हो तुम
हर मुस्कुराहट में बसते हो तुम,कभी हसाते हो तुम
कभी रुलाते हो तुम,हर पल याद आते हो तुम !!
आज तुम रंग दो अपने रंग में कोरा हूँ संवर जाऊँ
होठों पर होंठ रख दो कहीं प्यास से ना मर जाऊँचूम कर बदन को होंठो से अपने गुलाबी कर दो,
तेरे होंठो की तलब है छू कर मुझे श़राबी कर दो।मत चूमों ग़ुलाब की कलियों को जलन होती है,
आहिस्ता चूमना मुझे बदन में सिहरन होती है।मैं दबाऊँ तो बेतहाशा दर्द और थोड़ी हरारत है,
तुम दबाओ तो लुत्फ़ होंठो कैसी की श़रारत है।सुबह आँख खुलते ही तुम मदहोश कर देते हो,
कुछ बोलूँ पर चूम कर लब ख़ामोश कर देते हो।
ज़िंदगी पर बेहतरीन पंक्तियाँ
नीचे कुछ ऐसी पंक्तियाँ हैं जो ज़िंदगी को एक नए नज़रिए से देखना सिखाती हैं।
वो बातें मेरे ही जेहन में सब दबी निकली – हिंदी कविता

वो बोलता रहा इक बात ना नयी निकली,
जो उसने बोला वो सब बात ही कही निकली!सुनाता सबको अगर मैं कहीं गलत होता,
यकीन मानो न मुझमें कोई कमी निकली!जो शक था मेरा मेरे वो भी सामने आया,
खुशी हुई कि मेरी उलझने सही निकली!मुझे तलाश थी जिस चीज़ की जमाने में,
वो चीज मेरे ही आंगन में तब छुपी निकली!भुलाना चाहा तो वो याद फिर बहुत आयी,
वो बातें मेरे ही जेहन में सब दबी निकली!!
🥀❣️✍🏻
बचपन बीत गया लड़कपन में
बचपन बीत गया लड़कपन में,
जवानी बीत रही घर बनाने में,
जंगल सी हो गई है जिंदगी,
हर कोई दौड़ रहा आंधी के गुबार में।हर रोज नई भोर होती,
पर नहीं बदलता जिंदगी का ताना बाना,
सब कर रहे हैं अपनी मनमानी,
लेकिन जी नहीं रहे अपनी जिंदगानी।कोई पास बुलाए तो डर लगता है,
कैसी हो गई है यह दुनिया बेईमानी,
सफर चल रहा है जिंदा हूं कि पता नहीं,
रोज लड़ रहा हूं चंद सांसे जीने के लिए।मिल नहीं रहा है कोई ठिकाना,
जहां दो पल सिर टिकाऊ,
ऐसे सो जाऊं की सपनों में खो जाऊं,
बचपन की गलियों में खो जाऊं।वो बेर मीठे तोड़ लाऊं,
सूख गया जो तालाब उसमें फिर से तैर आऊं,
मां की लोरी फिर से सुन आऊं,
भूल जाऊं जिंदगी का ये ताना बाना।देर सवेर फिर से भोर हो गई,
रातों की नींद फिर से उड़ गई,
देखा था जो सपना वो छम से चूर हो गया,
जिंदगी का सफर फिर से शुरू हो गया।आंखों का पानी सूख गया,
चेहरे का नूर कहीं उड़ सा गया,
अब जिंदगी से एक ही तमन्ना,
सो जाऊं फिर से उन सपनों की दुनिया में।
तेरा साथ न मिला – हिंदी कविता
हाथ थाम कर भी तेरा सहारा न मिला
में वो लहर हूँ जिसे किनारा न मिलामिल गया मुझे जो कुछ भी चाहा मैंने
मिला नहीं तो सिर्फ साथ तुम्हारा न मिलावैसे तो सितारों से भरा हुआ है आसमान मिला
मगर जो हम ढूंढ़ रहे थे वो सितारा न मिलाकुछ इस तरह से बदली पहर ज़िन्दगी की हमारी
फिर जिसको भी पुकारा वो दुबारा न मिलाएहसास तो हुआ उसे मगर देर बहुत हो गयी
उसने जब ढूँढा तो निशान भी हमारा न मिला
💔🥀✍️
Heart Touching Poetry in Hindi — दिल छू लेने वाली कविताएँ
नीचे कुछ ऐसी पंक्तियाँ हैं जो सीधे दिल को छू जाती हैं — रिश्तों, एहसासों और ज़िंदगी के गहरे पलों पर।

मुझे नींद नहीं आएगी
तो मुझे सुला पाओगे क्या,मैं नासमझ हूँ बहुत मुझे,
हर बात समझा पाओगे क्या,हाँ माना थोड़ा ज्यादा गुस्सा आता हैं,
पर मेरे गुस्से मे प्यार ढूंढ़ पाओगे क्या !
पूरी झल्ली है वो
पूरी दुनिया जब बुरा-भला कह रही थी मुझे
तो I Love you कहा था, उसने मुझे
जब दुनिया ने तोड़-मरोड़कर रख दिया था मुझे
तो उसने सहारा देकर, फिर से आगे बढ़ना सिखाया था मुझे
न जाने क्या देखा था उस पगली ने मुझमें !जब परछाई ने भी साथ छोड़ दिया था मेरा, वो मेरे साथ पल-पल खड़ी थी
न जाने क्यों….. मैं पूरी दुनिया से अलग लगा था उसे
जब सबकुछ हार गया था मैं, तो वो जीत बनकर साथ खड़ी थी मेरे
और देखते-देखते मेरे पूरे अस्तित्व में हीं समा गई वो
मैं उसका बन गया था, और मेरी बन गई थी वो
मुझे प्यार करते-करते….. खुद प्यार बन गई थी वो
तभी तो कहता हूँ, लड़की नहीं……. पूरी झल्ली है वो
अब उसे बहुत प्यार करता हूँ मैं, वो जान है मेरी… ये इकरार करता हूँ मैंआजकल प्यार की नई कहानी लिख रहे हैं, वो और मैं
वैसे तो पूरी दुनिया है अब मेरे साथ, पर मेरे सबसे पास है वो
तभी तो कहता हूँ, लड़की नहीं……. पूरी झल्ली है वो
Sad Life Poetry in Hindi — ज़िंदगी के दर्द पर कविताएँ
ज़िंदगी हमेशा आसान नहीं होती। नीचे कुछ ऐसी पंक्तियाँ हैं जो उन मुश्किल, थके हुए पलों को बयां करती हैं जब सब कुछ भारी लगने लगता है।
मेरी ज़िन्दगी – हिंदी कविता

बड़ी बेकार है मेरी जिंदगी, एक सवाल है मेरी जिंदगी
बेवजह शोर करती है, एक रबाब है मेरी जिंदगीना दुनिया की है खबर, ना मेरी ये सुनती है
बेवजह बहकता रहता हूं, एक शराब है मेरी जिंदगीना खुशियों की कद्र है, ना राहत से दोस्ती है
मेरा सुकून ओढ़े रहती है, एक हिजाब है मेरी जिंदगीहर शब्द झूठा है, हर ख्याल बेबस है
शायरों की फेंकी हुई, एक किताब है मेरी जिंदगीजो मुझसे ही अनजान है, बस ज़रा सी जान है
जो कभी सच हो ना सके, एक ख्वाब है मेरी जिंदगीदुनिया को लगता है आसान है मेरी जिंदगी
मौत का एक फरमान है मेरी जिंदगी
मुझ पर एक एहसान है मेरी जिंदगी
बस पल दो पल की मेहमान है मेरी जिंदगी
जीना सिखाए जा रहा है – हिंदी कविता
दिन-बदिन,
तेरी आदत मुझको लगाए जा रहा है।तुझे पाया नहीं अबतक,
तुझे खोने का डर सताए जा रहा है।मेरे हाथों से छीनकर,
अपने हिसाब से जिंदगी चलाए जा रहा है।तेरे आने से,
दिल मेरा, अब उसको भुलाए जा रहा है।कुछ हुआ है अलग,
तेरे आने से, बताए जा रहा है।एक बार फिर से,
मुझको जीना, सिखाए जा रहा है।
❤️🌹✍️
प्रसिद्ध हिंदी कविताएँ — Famous Poems
कुछ कविताएँ छोटी होती हैं, पर कुछ में पूरी कहानी बसती है। नीचे ऐसी ही लंबी और प्रसिद्ध हिंदी कविताएँ हैं, जिन्हें पढ़ते-पढ़ते आप उनमें खो जाएँगे।
थोड़ा थक सा जाता हूं अब मै… – हिंदी कविता

“थोड़ा थक सा जाता हूं अब मै…
इसलिए, दूर निकलना छोड़ दिया है,
पर ऐसा भी नही हैं कि अब…
मैंने चलना ही छोड़ दिया है।फासलें अक्सर रिश्तों में…
अजीब सी दूरियां बढ़ा देते हैं,
पर ऐसा भी नही हैं कि अब मैंने..
अपनों से मिलना ही छोड़ दिया है।हाँ जरा सा अकेला महसूस करता हूँ…
खुद को अपनों की ही भीड़ में,
पर ऐसा भी नहीं है कि अब मैंने…
अपनापन ही छोड़ दिया है।याद तो करता हूँ मैं सभी को…
और परवाह भी करता हूँ सब की,
पर कितनी करता हूँ…
बस, बताना छोड़ दिया है।।”
😇💯✍🏻
क़ैद
असर ये हुआ उसके जाने से
आवाज़ आने लगी मैखाने से
बातें करने लगा मैं रातों से
धूल उड़ने लगी किताबों सेहर क़तरा जाम का शौक से पिया गया
हर शौक पूरा किया इन हाथों से
फिर उसकी कही बातें भी आती है याद
आने दो क्या ही होता है बातों सेबेबस पंछी आज अब्र का राजा है
अब तो उसको डर नहीं हवाओं से
आने वाले जो थे सारे अपने थे
कोई गिला नहीं है जाने वालों सेधीरे धीरे याद भी उसकी जाएगी
दर लगता है मुझको उसकी यादों से
अब ज़ुल्फ़ों के जाल से दूर ही रहना है
क़ैद था मैं इस जाल में सालों से
Breakup Poetry in Hindi — टूटे रिश्ते पर कविताएँ
रिश्ता टूटना आसान नहीं होता। नीचे कुछ ऐसी पंक्तियाँ हैं जो बिछड़ने के उस दर्द को बयां करती हैं, जब कोई अपना अचानक पराया हो जाता है।
कहानी अधूरी रह जाएगी – हिंदी कविता

शायद तेरी मेरी कहानी अधूरी रह जाएगी
हमारे इश्क़ की दास्तां यहीं दफन हो जाएगीलगाएगी ये दुनिया हम पर हजारों बंदिशें लेकिन
हमारी प्रेम कहानी फिर भी अमर हो जाएगीकुछ पल ही बिता पाएंगे एक दूसरे के साथ
फिर जिंदगी पता नहीं किस मोड़ पर ले आएगीना तू मेरे साथ, ना मैं तेरे साथ
एक दूसरे की कमी हमें बहुत सताएगीलेकिन तू बेफिक्र होकर मुझ पर विश्वास करना
मेरे दिल में तेरी जगह किसी को ना मिल पाएगीअभी तो हजारों रंग बदलेगी ये ज़िन्दगी
ना तू मुझे भूलना, ना मैं तुझे
ऐसे ही एक दूसरे की याद के साथ
जिंदगी गुजर जाएगी ।।
🥀😊✍️
जाओ ना – हिंदी कविता
मुझे उदास कर रहे हो जाओ ना
मतलब की बात कर रहे हो जाओ ना
हार कर आये हो अपना इश्क़ तुम
बहुत परेशान लग रहे हो जाओ नाकहाँ से आये थे मेरे दिल में तुम
अब गैर लग रहे हो जाओ ना
ढूंढ लो कोई नया बहाना तुम
बदल गया हूँ मैं भी अब जाओ नागिर रहे हो अपनी ही नज़रों से तुम
कुछ तो करो शर्म जाओ ना
आँखें भीगी लग रही है क्या हुआ
तुम भी मुझसे लग रहे हो जाओ नाभर गए जो थे पुराने ज़ख्म अब
फिर नए बना रहे हो जाओ ना
पास कब्र के ही बैठे रहोगे क्या
बुला रही है ज़िन्दगी जाओ ना
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मैं चलना चाहती हूं तुम्हारे साथ – हिंदी कविता

मैं चलना चाहती हूं तुम्हारे साथ
कुछ इस तरह की अगर गिरूं
तो उठने की जरूरत ही ना हो !मैं खिलना चाहती हूं तुम्हारी,
खुशबू से कुछ इस तरह !कि मैं मुरझाऊं तो इत्र की जरूरत ही ना हो,
मैं सजना चाहती हूं तुम्हारे उन
अल्फाजों से इस तरह,
कि मैं पहनूं तो गहनों की जरूरत ही ना हो !मैं बंधना चाहती हूं तुम्हारी आत्मा से कुछ इस तरह
की जिस्मों को बांधने की जरूरत ही ना हो !!
जिंदगी गुलामी में नहीं
जिंदगी गुलामी में नहीं, आजादी से जियो,
लिमिट में नहीं अनलिमिटेड जिओ,
कल जी लेंगे इस ख्याल में मत रहो,
क्या पता आपका कल हो ना हो।कितनी दूर जाना है पता नहीं ,
कितनी दूर तक चलेगी पता नहीं,
लेकिन कुछ ऐसा कर जाना है,
तुम हो ना हो, फिर भी तुम रहो।कहीं धूप तो, कहीं छाव है,
कहीं दुख तो, कहीं सुख है,
हर घर की यही कहानी है,
यह रीत पुरानी है।आज रात दुख वाली है तो कल दिवाली है,
दुख-दर्द और खुशियों से भरी यही जिंदगानी है,
तेरी मेरी यह कहानी निराली है,
यह कहानी पुरानी है, लेकिन हर पन्ना नया है।आज नया है तो कल पुराना है,
फिर किसी और को आना है,
फिर किसी को जाना है,
यही मतवाली जिंदगी का तराना है।
इश्क़ मोहब्बत हिंदी कविता
एक चांदनी रात हो
और वह मेरे साथ हो
सारी दुनिया भूल कर
अपनी सांसो को आत्मसात करें
आओ मिलकर प्यार करेंउनके साथ कुछ हसीन पलों को बुने
लेकर हाथों में उनका हाथ
अपने दिल के जज्बातों को बयां करें
कुछ इस तरह से उनके सामने
हम अपने प्यार का इजहार करें..!!कुछ गहरा सा लिखना था,
इश्क से ज्यादा क्या लिखूँ ?कुछ सदियों सा लिखना था,
तुम्हारी यादों से ज्यादा क्या लिखूँ ?कुछ ठहरा सा लिखना था,
दर्द से ज्यादा क्या लिखूँ ?कुछ अपना सा लिखना था,
तेरे सपनों से ज्यादा क्या लिखूँ ?कुछ अहसास सा लिखना था,
तेरी मुस्कान से ज्यादा क्या लिखूँ ?कुछ समन्दर सा लिखना था,
आँसू से ज्यादा क्या लिखूँ ?कुछ खुबसूरती सा लिखना था,
आँखो से ज्यादा क्या लिखूँ ?
सुनो
अब जिन्दगी लिखनी है,
तुमसे ज्यादा क्या लिखूँ !!दिल छू जाने वाली कविता
मैंने कहा वो अजनबी हैं
दिल ने कहा ये लगी हैं,
मैंने कहा वो दूजा हैं
दिल ने कहा फिर भी अपना हैं !मैंने कहा वो दो पल की मुलाकात हैं
दिल ने कहा जो दो पल में पूरी जिन्दगी,
जी ले यही तो प्यार हैं !मैंने कहा वो मेरी भूल हैं
दिल ने कहा फिर भी कबुल हैं,मैंने कहा वो मेरी हार हैं
दिल ने कहा यही तो प्यार हैं !महकता एहसास हो तुम
महकता एहसास हो तुम,
कोई फूल गुलाब हो तुम,
ठंडक का फरमान हो तुम !!कोई उजला चांद हो तुम,
क्षितिज सी अनंत हो तुम,
किसी ध्रुवतारे सी हो तुम !!
इनायतों का अंबार हो तुम,
मोहब्बत का दीदार हो तुम,
पतझड़ की बाहर हो तुम !!प्यासे दिल का जाम हो तुम,
धधकती हुई आग हो तुम,
सूखे में बरसात हो तुम !!धड़कनों की तार हो तुम,
इस नाचीज की जान हो तुम !!
खवाब से अब ज़रा जगने लगा हूँ – हिंदी कविता

खवाब से अब ज़रा जगने लगा हूँ
जिंदगी को बेहतर समझने लगा हूं।उड़ता था शायद कभी ऊँची हवा में,
जमीं पर अब पैदल चलने लगा हूँ।लफ़्ज़ों की मुझको ज़रूरत नहीं है,
चेहरों को जब से मैं पढ़ने लगा हूँ।थक जाता हूं अक्सर अब शोर से,
खामोशियों से बातें करने लगा हूँ।दुनियाँ की बदलती तस्वीर देख कर,
शायद मैं कुछ कुछ बदलने लगा हूँ।नफ़रत के ज़हर को मिटाना ही होगा,
इरादा यह मज़बूत करने लगा हूँ।परवाह नहीं कोई साथ आए मेरे,
मैं अकेला ही आगे बढ़ने लगा हूँ।
✍🏻✍🏻✍🏻
दो पल की जिंदगी है – हिंदी कविता
दो पल की जिंदगी है,
आज बचपन, कल जवानी,
परसों बुढ़ापा, फिर खत्म कहानी है।चलो हंस कर जिए, चलो खुलकर जिए,
फिर ना आने वाली यह रात सुहानी,
फिर ना आने वाला यह दिन सुहाना।कल जो बीत गया सो बीत गया,
क्यों करते हो आने वाले कल की चिंता,
आज और अभी जिओ, दूसरा पल हो ना हो।आओ जिंदगी को गाते चले,
कुछ बातें मन की करते चलें,
रूठो को मनाते चलें।आओ जीवन की कहानी प्यार से लिखते चले,
कुछ बोल मीठे बोलते चले,
कुछ रिश्ते नए बनाते चले।क्या लाए थे क्या ले जायेंगे,
आओ कुछ लुटाते चले,
आओ सब के साथ चलते चले,
जिंदगी का सफर यूं ही काटते चले।
दर्द भरी कविता इमेज

कुछ हसरतें और भी बढ़ जाती है तुझे देखकर,
ज़िंदगी फिर जीने को मन करता है तुझे देखकर !तेरे बगैर हम तो मायूस हो चले थे,
इक ख़्वाहिश फिर जगी तुझे देखकर !समां धुँधला गया था समय के आगोश में,
फिर सब झिलमिल हो उठी तुझे देखकर !खोकर भी पा लिया मैंने तेरी चाहत को,
वो सब मुनासिब हुआ तुझे देखकर !यूँ तो रो देना आसान होता है,
नम आँखें भी मुस्काई तुझे देखकर !हम तो किसी भी चीज के काबिल ना थे,
काबिल हो चले हम तुझे देखकर !खामोश रहकर भी तुझे बोलना आता है,
मेरी आँखें बोल उठी तुझे देखकर !!अब तो अच्छा लगता है हर मौसम,
फिर बेमौसम बरसात हुई तुझे देखकर !!
रूरूंगा मैं तुमसे इक दिन इस बात पे
जब रूठा था मैं तो मनाया क्यूँ नहीकहते थे तुम तो करते हो मुझसे प्यार,
जो दिखाया मैने नखरा तो उठाया क्यूँ नहीमुहँ फेर कर जब खडा था मैं वहां
बुलाकर पास सीने से अपने लगया क्यूँ नहीपकड कर तेरे हाथ पुछूंगा मैं तुमसे
हक अपना मुझ पर तुमने जताया क्यूँ नहीइस धागे का एक सिरा तुम्हारे पास भी तो था
उलझा था अगर मुझसे तो तुमने सुलझाया क्यूँ नही

प्यास लगी थी गजब की… मगर पानी मे जहर
था… पीते तो मर जाते और ना पीते तो भी मर
जाते… बस यही दो मसले, जिंदगीभर ना हल
हुए!!ना नींद पूरी हुई, ना ख्वाब मुकम्मल हुए!!!
वक़्त ने कहा…..काश थोड़ा और सब्र होता!!!
संब्र ने कहा….काश थोड़ा और वक़्त होता!!"शिकायते तो बहुत है तुझसे ऐ जिन्दगी, पर चुप
इसलिये हु कि, जो दिया तूने, वो भी बहुतो को
नसीब नहीं होता…
देखा ना गया –
मुझसे उसका जाना देखा ना गया
उसके बाद फिर ज़माना देखा ना गया
उसके होने वाले महफ़िल की जान होंगे
हमें फिर शहर में कभी देखा ना गयाउसके दिए हुए अब ज़ख्म भरने लगे
चरसाज़ों से मेरा दर्द देखा ना गया
क़ैद हुए बैठे हैं सब अपनी क़िस्मत में
सुना है यहाँ कोई परिंदा देखा ना गयाबदल गयी है हवा अब मौसम ठंडा है
आशिक़ों में अब वो लावा देखा ना गया
जिसे छोड़ आए हम यादों के सहारे
हमसे अब वो खाली कमरा देखा ना गयाअब वो किसी और के हुजरे की शान है
मुझसे उसके माथे पर टीका देखा ना गया
जहन्नुम की देखलीज़ पर एक बैठी है
मुझसे मेरी रूह का तड़पना देखा ना गया
विदाई और याद पर कविताएँ
कुछ लोग चले जाते हैं, पर उनकी यादें हमेशा साथ रहती हैं। नीचे कुछ ऐसी कविताएँ हैं जो विदाई के उस गहरे एहसास और पीछे छूट गई यादों को शब्दों में बयां करती हैं।
जहाँ खामोश रहना है, वहाँ मुँह खोल जाते है – हिंदी कविता

कहाँ पर बोलना है, और कहाँ पर बोल जाते हैं।
जहाँ खामोश रहना है, वहाँ मुँह खोल जाते हैं। ।
कटा जब शीश सैनिक का, तो हम खामोश रहते हैं।
कटा एक सीन पिक्चर का, तो सारे बोल जाते हैं।
नयी नस्लों के ये बच्चे, जमाने भर की सुनते हैं।
मगर माँ बाप कुछ बोले, तो बच्चे बोल जाते हैं।।
बहुत ऊँची दुकानों में, कटाते जेब सब अपनी।
मगर मज़दूर माँगेगा, तो सिक्के बोल जाते हैं।।
अगर मखमल करे गलती, तो कोई कुछ नहीं कहता।
फटी चादर की गलती हो, तो सारे बोल जाते हैं।
हवाओं की तबाही को, सभी चुपचाप सहते हैं।
च़रागों से हुई गलती, तो सारे बोल जाते हैं।।
बनाते फिरते हैं रिश्ते, जमाने भर से अक्सर हम
मगर घर में जरूरत हो, तो रिश्ते भूल जाते हैं।।
कहाँ पर बोलना है, और कहाँ पर बोल जाते हैं।
जहाँ खामोश रहना है, वहाँ मुँह खोल जाते हैं। ।
था मैं नींद में और… मुझे इतना सजाया जा रहा था….
बड़े प्यार से मुझे… नहलाया जा रहा था….
ना जाने था वो कौन सा अजब खेल
मेरे घर में ….
बच्चो की तरह मुझे…. कंधे पर उठाया जा रहा था….
था पास मेरा हर अपना…. उस वक़्त….
फिर भी मैं हर किसी के…. मन से भुलाया जा रहा था…
जो कभी देखते भी न थे…. मोहब्बत की निगाहों से….
उनके दिल से भी प्यार… मुझ पर लुटाया जा रहा था…
मालूम नही क्यों हैरान था…. हर कोई मुझे
सोते हुए देख कर….
जोर-जोर से रोकर… मुझे जगाया जा रहा था…
काँप उठी मेरी रूह वो मंज़र
देख कर….
जहाँ मुझे हमेशा के लिए… सुलाया जा रहा था….
मोहब्बत की इन्तहा थी… जिन दिलों में मेरे लिए ….
उन्हीं दिलों के हाथों ….. आज मैं जलाया जा रहा था!!!
Short poetry in Hindi
कभी-कभी सिर्फ़ दो लाइनें वो कह जाती हैं जो लंबी कविताएँ भी नहीं कह पातीं। नीचे कुछ छोटी, पर गहरी 2 line कविताएँ हैं — पढ़ने और शेयर करने में बस कुछ सेकंड।

प्यास लगी थी गजब की… मगर पानी मे जहर
था… पीते तो मर जाते और ना पीते तो भी मर
जाते… बस यही दो मसले, जिंदगीभर ना हल
हुए!!
ना नींद पूरी हुई, ना ख्वाब मुकम्मल हुए!!!
वक़्त ने कहा…..काश थोड़ा और सब्र होता!!!
संब्र ने कहा….काश थोड़ा और वक़्त होता!!
"शिकायते तो बहुत है तुझसे ऐ जिन्दगी, पर चुप
इसलिये हु कि, जो दिया तूने, वो भी बहुतो को
नसीब नहीं होता…वो कहानी जैसी चलती रही
मै रुक गया एक मोड़ पे…
वो इश्क़ मेरा मासूम सा,
खड़ा रहा एक मोड़ पर.. |तू बेवफ़ा तेरा क्या कहना
मुझे ना गिला है किसी और से…
बस एक दफा तू सामने आ जाए,
और मै निकलूं तेरी ओर से..।कैसे तुमने दिल तोड़ा
कैसे मै आहें आज भी भरता हूं…
तुझे भूल पाऊं भी तो कैसे,
आखिर आज भी तुझपे जो मरता हूं ।।
कितना सुंदर लिखा है किसी ने

ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा
क़ाफिला साथ और सफ़र तन्हाअपने साये से चौंक जाते हैं
उम्र गुज़री है इस क़दर तन्हारात भर बोलते हैं सन्नाटे
रात काटे कोई किधर तन्हादिन गुज़रता नहीं है लोगों में
रात होती नहीं बसर तन्हाहमने दरवाज़े तक तो देखा था
फिर न जाने गए किधर तन्हाज़िंदगी का श्रृंगार भी तो है,
इश्क़ माना बुखार भी तो है !वस्ल की वादियां हंसी है,
तो हिज्र एक पठार भी तो है !कैसे कह दूँ होश में हूँ,
मुझ पे तेरा खुमार भी तो है !तुझ से शिकवे हज़ार है,
तो रात दिन तुम्हारा इंतज़ार भी तो है !

ख़ुदा तू भी नहीं, मैं भी नहीं – हिंदी कविता
गलतियों से जुदा तू भी नहीं और मैं भी नहीं,
दोनों इंसान हैं खुदा तू भी नहीं, मैं भी नहीं।गलतफहमियों ने कर दी दोनों में पैदा दूरियां,
वरना फितरत का बुरा तू भी नहीं मैं भी नहीं।अपने अपने रास्तों पे दोनो का सफ़र जारी रहा,
एक लम्हें को रुका तु भी नहीं मैं भी नहीं ।चाहते बहुत थे दोनों एक दूसरे को
मगर ये हक़ीक़त मानता तु भी नहीं मैं भी नहीं।गलतियों से जुदा तू भी नहीं और मैं भी नहीं,
दोनों इंसान हैं ख़ुदा तू भी नहीं, मैं भी नहीं।
😇❣️✍️
वो बातें मेरे ही जेहन में सब दबी निकली – हिंदी कविता
वो बोलता रहा इक बात ना नयी निकली,
जो उसने बोला वो सब बात ही कही निकली!सुनाता सबको अगर मैं कहीं गलत होता,
यकीन मानो न मुझमें कोई कमी निकली!जो शक था मेरा मेरे वो भी सामने आया,
खुशी हुई कि मेरी उलझने सही निकली!मुझे तलाश थी जिस चीज़ की जमाने में,
वो चीज मेरे ही आंगन में तब छुपी निकली!भुलाना चाहा तो वो याद फिर बहुत आयी,
वो बातें मेरे ही जेहन में सब दबी निकली!!
🥀❣️✍🏻
नारी पर कविता — Women Poetry in Hindi
नारी — माँ, बेटी, बहन, दोस्त, हमसफ़र। नीचे कुछ ऐसी कविताएँ हैं जो स्त्री के अलग-अलग रूपों और उसकी ताकत को शब्दों में बयां करती हैं।

कौन कहता हैं की,
नारी कमज़ोर होती है।
आज भी उसके हाथ में,
अपने सारे घर को चलाने की डोर होती है।वो तो दफ्तर भी जाती हैं,
और अपने घर परिवार को भी संभालती हैं।
एक बार नारी की ज़िंदगी जीके तो देखों,
अपने मर्द होने के घमंड यु उतर जायेंगा,
अब हौसला बन तू उस नारी का,
जिसने ज़ुल्म सहके भी तेरा साथ दिया।तेरी ज़िम्मेदारियों का बोझ भी,
ख़ुशी से तेरे संग बाट लिया।
चाहती तो वो भी कह देती, मुझसे नहीं होता।
उसके ऐसे कहने पर,
फिर तू ही अपने बोझ के तले रोता।
तोड़ के हर पिंजरा
जाने कब मैं उड़ जाऊँगी
चाहे लाख बिछा लो बंदिशे
फिर भी दूर आसमान मैं अपनी जगह बनाऊंगी मैं
हाँ गर्व है मुझे मैं नारी हूँ
भले ही परम्परावादी जंजीरों से बांधे है दुनिया के लोगों ने पैर मेरे
फिर भी उस जंजीरों को तोड़ जाऊँगी
मैं किसी से कम नहीं सारी दुनिया को दिखाऊंगी
हाँ गर्व है मुझे मैं नारी हूँ

छोटी सी है ज़िन्दगी
हर बात में खुश रहो…जो चेहरा पास न हो,
उसकी आवाज़ में खुश रहो…कोई रूठा हो आपसे,
उसके अंदाज़ में खुश रहो…जो लौट के नहीं आने वाले,
उनकी याद में खुश रहो…कल किसने देखा है…
अपने आज में खुश रहो…
वो बचपन भी कितना सुहाना था,
जिसका रोज एक नया फसाना था ।कभी पापा के कंधो का,
तो कभी मां के आँचल का सहारा था।कभी बेफिक्रे मिट्टी के खेल का,
तो कभी दोस्तो का साथ मस्ताना था ।कभी नंगे पाँव वो दोड का,
तो कभी पतंग ना पकड़ पाने का पछतावा था ।कभी बिन आँसू रोने का,
तो कभी बात मनवाने का बहाना थासच कहूँ तो वो दिन ही हसीन थे,
ना कुछ छिपाना और दिल मे जो आए बताना था ।

जीता रहा मै अपनी धुन मे,
दुनिया का कायदा नही देखा !रिश्ता निभाया तो दिल से,
कभी फायदा नही देखा !एक किताब की तरह हूँ मैं,
कितनी भी पुरानी हो जाए,
पर उसके अलफ़ाज़ नहीं बदलेंगे !कभी याद आये तो,
पन्ने पलट कर देखना,
हम कल जैसे थे,आज वैसे है,
कल भी वैसे ही मिलेंगे !
जीता रहा मै अपनी धुन मे,
दुनिया का कायदा नही देखा !रिश्ता निभाया तो दिल से,
कभी फायदा नही देखा !एक किताब की तरह हूँ मैं,
कितनी भी पुरानी हो जाए,
पर उसके अलफ़ाज़ नहीं बदलेंगे !कभी याद आये तो,
पन्ने पलट कर देखना,
हम कल जैसे थे,आज वैसे है,
कल भी वैसे ही मिलेंगे !
One Sided Love Poetry in Hindi — एकतरफ़ा प्यार
सबसे गहरा दर्द उस प्यार का होता है जो सिर्फ़ एक तरफ़ से होता है। नीचे कुछ ऐसी कविताएँ हैं जो एकतरफ़ा मोहब्बत के उस चुपचाप एहसास को बयां करती हैं — जहाँ कहा कुछ नहीं जाता, पर महसूस सब होता है।
मुस्कुरा दिया करता हूँ – हिंदी कविता

उलझनें है बहुत
सुलझा लिया करता हूँ
फोटो खिंचवाते वक्त मैं अक्सर
मुस्कुरा दिया करता हूँ…!क्यों नुमाइश करू मैं अपने
माथे पर शिकन की
मैं अक्सर मुस्कुरा के
इन्हें मिटा दिया करता हूँक्योंकि
जब लड़ना है खुद को खुद ही से……!
तो हार और जीत में कोई फर्क नहीं रखता हूं….!हारूं या जीतूं कोई रंज नहीं
कभी खुद को जिता देता हूँ
कभी खुद ही जीत जाया करता हूं
इसलिए भी मुस्कुरा दिया करता हूँ..
😇✍️
खवाब से अब ज़रा जगने लगा हूँ

खवाब से अब ज़रा जगने लगा हूँ
जिंदगी को बेहतर समझने लगा हूं।उड़ता था शायद कभी ऊँची हवा में,
जमीं पर अब पैदल चलने लगा हूँ।लफ़्ज़ों की मुझको ज़रूरत नहीं है,
चेहरों को जब से मैं पढ़ने लगा हूँ।थक जाता हूं अक्सर अब शोर से,
खामोशियों से बातें करने लगा हूँ।दुनियाँ की बदलती तस्वीर देख कर,
शायद मैं कुछ कुछ बदलने लगा हूँ।नफ़रत के ज़हर को मिटाना ही होगा,
इरादा यह मज़बूत करने लगा हूँ।परवाह नहीं कोई साथ आए मेरे,
मैं अकेला ही आगे बढ़ने लगा हूँ।
✍🏻✍🏻✍🏻
हर बार कसूर हवा का नही होता – हिंदी कविता
ऐ उम्र ?
कुछ कहा मैंने,
पर शायद तूने सुना नहीं..!
तू छीन सकती है बचपन मेरा,
पर बचपना नहीं..!!हर बात का कोई जवाब नही होता…,
हर इश्क का नाम खराब नही होता…!
यूं तो झूम लेते है नशे में पीनेवाले..
मगर हर नशे का नाम शराब नही होता…!खामोश चेहरे पर हजारों पहरे होते है….!
हंसती आखों में भी जख्म गहरे होते है….!
जिनसे अक्सर रुठ जाते है हम,
असल में उनसे ही रिश्ते गहरे होते है….!किसी ने खुदा से दुआ मांगी.!
दुआ में अपनी मौत मांगी,
खुदा ने कहा, मौत तो तुझे दे दें मगर…!
उसे क्या कहूँ जिसने तेरी जिंदगी मांगी…!हर इंन्सान का दिल बुरा नही होता…
हर एक इन्सान बुरा नही होता.
बुझ जाते है दीये कभी तेल की कमी से….!
हर बार कसूर हवा का नही होता..
Sad Love Poetry in Hindi — अधूरी मोहब्बत
हर मोहब्बत मुकम्मल नहीं होती। नीचे कुछ ऐसी कविताएँ हैं जो उस अधूरी मोहब्बत का दर्द बयां करती हैं — जहाँ प्यार तो था, पर वो कभी पूरा न हो सका।
कल एक झलक ज़िंदगी को देखा

कल एक झलक ज़िंदगी को देखा,
वो राहों पे मेरी गुनगुना रही थी,फिर ढूँढा उसे इधर उधर
वो आँख मिचौली कर मुस्कुरा रही थी,एक अरसे के बाद आया मुझे क़रार,
वो सहला के मुझे सुला रही थीहम दोनों क्यूँ ख़फ़ा हैं एक दूसरे से
मैं उसे और वो मुझे समझा रही थी,मैंने पूछ लिया- क्यों इतना दर्द दिया
कमबख्त तूने,वो हँसी और बोली- मैं जिंदगी हूँ पगले
तुझे जीना सिखा रही थी।लिखी है ये ग़ज़ल सिर्फ़ तेरे लिए,
दीवाने बने भी तो सिर्फ़ तेरे लिए !किसी को नहीं देखेंगी अब ये आँखें,
नज़रें तरसेंगी भी तो सिर्फ़ तेरे लिए !हर साँस में याद करेंगे तुझे,
ये साँस निकलेगी भी तो सिर्फ़ तेरे लिए !हर प्यार से प्यारे लगते हो तुम मुझे,
मैने प्यार सीखा भी तो सिर्फ़ तेरे लिए…!!
Ho Sakte The Tum

सुखे रेगिस्तान के मरुद्यान सी हो सकते थे तुम,
मनो जैसे तुम सुखद, मनोरम और थकाननाशक !या फिर हो सकते थे स्वच्छ गंगा के समान,
पवित्र, शाश्वत और श्रद्धा से निपुण !तुम हो सकते थे चिलचिलती गर्मियों में ठंडी हवाओं सी,
जैसे मधुर, सुहानी व मदस्तस्त !या फिर तुम हो सकते थे किसी समंदर
के जल सी, खारा, अप्रिय और विनाशकारी !लेकिन तुमने इन सबसे अलग,
चाँदनी रातों में किसी दोपहर का होना दूरस्थ किंतु चक्षुप्रिय !तेज प्रकाश के आकर्षण को जब्त किया,
जिसे ना तो अनदेखा करना मेरे वश में था
और ना ही जिसे छूने मात्र जैसी मुझेमे वो ऊँचाई !
आंखों में क़ैद एक मंजर देखा है
आंखों में क़ैद, एक मंजर देखा है,
मै प्यासा रहा, लेकिन समन्दर देखा है,मुझे ना दिखाना खेल दुनियां के,
मैने हरियाली में भी, पेड़ो को बंजर देखा है।बड़े अजीब है, तरीके यहां,
रिश्ते निभाने के,
एक हाथ में प्यार,और दूजे में,
खंजर देखा है,मुझे ना दुआ देना इन बारिशों में,
फिर से जवां हो जाने की,
मैने बारिशों के बाद भी,
जमीं को बंजर देखा है,
🥀💯✍️
Best Hindi Poetry Lines — बेहतरीन पंक्तियाँ
कुछ पंक्तियाँ दिल में घर कर जाती हैं। नीचे अलग-अलग एहसासों पर चुनी हुई बेहतरीन हिंदी कविता की लाइनें हैं — छोटी, गहरी और याद रह जाने वाली।
रंगीन ख्वाहिशें
गुज़र रहे हैं उम्र के उस पहर से
ख्वाहिशें जहाँ ज़रा रंगीन होती हैं
शरारतों के बाद वाला सफर है ये
जहाँ गलतियां भी संगीन होती हैजिस्म इंसानी और खुशबु फूलों की
नज़रें गुलाब देखने की शौक़ीन होती है
मर गए जो हम अब आशिक़ कहलायेंगे
सबके नसीब में कहाँ ज़मीन होती हैकभी कभी खुद पर ही इलज़ाम लगाए हैं
कभी ज़माने भर में तौहीन होती है
यूँ तो अब क़िस्मत में अँधेरे ही रहे
कोई सवेरा लाएगा तस्कीन होती हैगुज़र रहे हैं उम्र के उस पहर से
ख्वाहिशें जहाँ ज़रा रंगीन होती हैं
शरारतों के बाद वाला सफर है ये
जहाँ गलतियां भी संगीन होती है
बिछड़न
एक रास्ता इश्क़ का एक ज़िन्दगी का
हमने इश्क़ करना मुनासिब समझा
भर गया वो उसे दूर जाना था
हमने दूर जाना ही मुनासिब समझाउसने रिश्ता निभाया गैरों की तरह
हमने उस गैर को अपना समझा
वार किया उसने दिल पे कई हज़ार
हमने उसका हर सितम अपना समझाअब गया है वो एक ठंडे शहर में
उसकी छाओं को भी हमने धुप समझा
किसी का होकर वो खुश बहुत है
वो खुश तो हमने खुदको खुश समझाबिछड़ जाने से मोहब्बत कम नहीं होती
बिछड़ जाने पर हमने ये समझा
उसकी यादें तो अब मिराज सी हैं
उस मिराज को भी हमने सच समझाहैरत कैसी अब हिज्र पे
हमने हिज्र को अपना समझा
तनहा हूँ और ठीक हूँ अब
हमने यार को एक खाब समझा
बची हर सांस गिनता हूँ, तेरी साँसों में ठहरा हूँ
बची हर सांस गिनता हूँ, तेरी साँसों में ठहरा हूँ,
दबी हर बात सुनता हूँ, तेरी बातों सा गहरा हूँ ।ज़माने से न भागा हूं, ज़माने में ही उतरा हूँ,
तेरे राज़ों को रख दिल में, ज़मी पर आज बिखरा हूँ।दिलों में जख्म है ढेरों, कई है दर्द के किस्से,
बची है अब ज़फा तेरी, उसी से बस मैं तेरा हूँ।यही बस सोचता हूँ मैं कि ये अब राज़ है कैसा?
मैं सोचूँ ये ही बस दिनभर, मैं तेरा हूँ या मेरा हूँ!मैं जो भी दर्द लिखता हूँ उसे तू रोज़ गाती है,
कभी ना दूर तुझसे हूँ लबों का गीत तेरा हूँ।ये कैसी बेरुखी तेरी जो अब तक दूर तू मुझसे,
ये मेरे दिल की हमदर्दी, मैं अब भी अक्स तेरा हूं।ये दरवाज़े भले ही बंद कर लेना तेरे दिल के,
मगर ये याद रखना तुम ,इसी पट का मै पहरा हूँ।ये मेरा और तेरा दिल फ़लक पर ही चमकता था,
मैं अब टूटा सितारा हूँ ज़मी पर आज ठहरा हूँ।मैं तारा हूँ तेरे दिल का मुकम्मल आसमां तू है,
मुकम्मल दिल हवेली है, फ़क़त उसका मैं कमरा हूँ।तू पूरा है समंदर सुन तू पूरा आसमां भी है,
बची छोटी ज़मी तेरी ,बचा उसका मैं ज़र्रा हूँ।मैं अब आवाज़ दूं तुझको , ये हिम्मत ना बची मुझमें
फसा हूँ ज़ख्म में इतने, लबो का बोल ठहरा हूँ।
हरिवंशराय बच्चन ने क्या खूब लिखा है

यहाँ सब कुछ बिकता है,
दोस्तों रहना जरा संभल के!
बेचने वाले हवा भी बेच देते है,
गुब्बारों में डाल के।सच बिकता है, झूट बिकता है,
बिकती है हर कहानी!
तीन लोक में फैला है,
फिर भी बिकता है बोतल में पानी!कभी फूलों की तरह मत जीना,
जिस दिन खिलोगे…
टूट कर बिखर जाओगे।जीना है तो पत्थर की तरह जियो;
जिस दिन तराशे गए
उसदिन “खुदा” बन जाओगे।।
💯🙏✍️
क्यों नहीं
होने लगी है अब घुटन
दिल की दीवारों से
अपना कह कर मुझको कोई
बुलाता क्यों नहींखुद को ही कमज़र्फ कह कर
खुद को ही फिर माफ़ करना
गले लगा कर मुझको कोई
मनाता क्यों नहींभीगना है मुझको भी
दरिया-ए-इश्क़ में
इस दरिया में मुझको कोई
भीगता क्यों नहींहो गए मशरूफ सब
अपने यार में
मुझको यार कह कर कोई
बुलाता क्यों नहींसोए हुए थे ख्वाहिश में
ख्वाब हसीन आएंगे
ख्वाबों में आ कर कोई
सताता क्यों नहींहोने लगी है अब घुटन
दिल की दीवारों से
अपना कह कर मुझको कोई
बुलाता क्यों नहीं
वो और मैं
मेरा घर था जिस गली में वहां उसका कुछ नहीं था
वो फिर भी मुझे देखने आया करती थी
उस पर भी ज़माने की नजर थी लेकिन
वो रोज़ कोई बहाना घर बनाया करती थीमेरे हाथ तो बस कांटे लगते थे
वो चुन के मेरे लिए गुलाब लाया करती थी
मैं अक्सर टूट कर बिखर जाता था
वो हमेशा मुझे संभाला करती थीमैं अपनी गज़लों में उलझा रहता था
वो नए हर्फ मेरे लिए लाया करती थी
मैं गैरों की लिखता रहता था और
वो मेरी तारीफ मुझे सुनाया करती थीबिछड़ना भी था हमारी किस्मत में लिखा
ऐसी बातों पर मुझे चुप कराया करती थी
जैसे ही आंखे छलकती थी मेरी
वो झट से मुस्कान लाया करती थीऔर फिर एक दिन मेरी रूह ने जिस्म छोड़ दिया
इतनी दूरी से भी वो मोहब्बत निभाया करती थी
अब जगह बदल गई थी हमारे मिलने की
अब वो मुझसे मिलने कब्र पर आया करती थी
जहाँ खामोश रहना है, वहाँ मुँह खोल जाते है
कहाँ पर बोलना है, और कहाँ पर बोल जाते हैं।
जहाँ खामोश रहना है, वहाँ मुँह खोल जाते हैं। ।
कटा जब शीश सैनिक का, तो हम खामोश रहते हैं।
कटा एक सीन पिक्चर का, तो सारे बोल जाते हैं।
नयी नस्लों के ये बच्चे, जमाने भर की सुनते हैं।
मगर माँ बाप कुछ बोले, तो बच्चे बोल जाते हैं।।
बहुत ऊँची दुकानों में, कटाते जेब सब अपनी।
मगर मज़दूर माँगेगा, तो सिक्के बोल जाते हैं।।
अगर मखमल करे गलती, तो कोई कुछ नहीं कहता।
फटी चादर की गलती हो, तो सारे बोल जाते हैं।
हवाओं की तबाही को, सभी चुपचाप सहते हैं।
च़रागों से हुई गलती, तो सारे बोल जाते हैं।।
बनाते फिरते हैं रिश्ते, जमाने भर से अक्सर हम
मगर घर में जरूरत हो, तो रिश्ते भूल जाते हैं।।
कहाँ पर बोलना है, और कहाँ पर बोल जाते हैं।
जहाँ खामोश रहना है, वहाँ मुँह खोल जाते हैं। ।
हर नक़्श ज़हन से मिटा के सोया कर।
हर नक़्श ज़हन से मिटा के सोया कर।
तू ये सारी दुनिया भुला के सोया कर।क्या खोया क्या पाया क्या ढूँढ रहा है।
खुदा को सब कुछ बता के सोया कर।नींद भले कितनी ही गहरी हो जाये।
पर ख्वाबों को जगा के सोया कर।मखमली अहसास तुझे सोने नही देगा।
ज़मीन पर बिस्तर बिछा के सोया कर।कल फिर से मुलाक़ात दुनिया से होगी।
ये चराग ए उम्मीद जला के सोया कर।दिए की लौ हर शब् बुझ ही जाती है।
एक आग सीने में लगा के सोया कर।मशीनी दौर में अहसास न मर जाएँ।
दो चार आँसू भी बहा के सोया कर।
Motivational Poetry in Hindi — प्रेरणादायक कविताएँ
मुश्किल वक़्त में कुछ शब्द दोबारा खड़े होने की ताकत दे जाते हैं। नीचे कुछ ऐसी प्रेरणादायक कविताएँ हैं जो हार के बीच भी आगे बढ़ने का हौसला देती हैं।
काश,जिंदगी सचमुच किताब होती

काश,जिंदगी सचमुच किताब होती
पढ़ सकता मैं कि आगे क्या होगा?
क्या पाऊँगा मैं और क्या दिल खोयेगा?
कब थोड़ी खुशी मिलेगी, कब दिल रोयेगा?
काश जिदंगी सचमुच किताब होती,
फाड़ सकता मैं उन लम्हों को
जिन्होने मुझे रुलाया है..
जोड़ता कुछ पन्ने जिनकी यादों ने मुझे हँसाया है…
खोया और कितना पाया है?
हिसाब तो लगा पाता कितना
काश जिदंगी सचमुच किताब होती,
वक्त से आँखें चुराकर पीछे चला जाता..
टूटे सपनों को फिर से अरमानों से सजाता
कुछ पल के लिये मैं भी मुस्कुराता,
काश, जिदंगी सचमुच किताब होती।
अचानक ज़िन्दगी में कभी
अचानक ज़िन्दगी में कभी,
एक अन्जान सा शख्स आता है…
जो दोस्त भी नहीं, हमसफ़र भी नही,
फिर भी दिल को बहुत बहुत भाता हैढेरों बाते होती हैं उस से,
हज़ारों दुख सुख भी बंटते हैं,
जो बातें किसी से नहीं करते थे,
वो भी हम उस से करते हैंहै तो वो अनजाना सा,
पर दिल को बहुत वो,
जाना पहचाना सा लगता है …
कोई रिश्ता नहीं है उससे,
फिर भी उसकी हर बात
मानने का दिल करता है….कोई हक नहीं है उस पर हमारा
फिर भी उस पर हक जताना
हमको अच्छा लगता है ..
जब कुछ भी सुनने का मन ना हो तब भी,
उसको सुनना अच्छा लगता है,
कुछ रिश्ते है जो ख़ास है।
कुछ रिश्ते है जो ख़ास है।
कुछ अपने मेरे पास है !!
कुछ रिश्तों ने खामोश किया
बस अपनों से ही आस है….जो पहले मेरे खास थे
उन्होंने तोड़े विश्वास है !!
कुछ ने खेला जज्बातों से
उनको नहीं अहसास है….कुछ हाथो से है छूट रहे
कुछ धीरे-धीरे रुठ रहे !!
कुछ ने पहने मुखोटे है।
और अपनों को ही लूट रहे…
कुछ ऐसा कर जाओ – हिंदी कविता
मेरी आँखे ना देखो तुम,
मेरे दिल में उतर जाओ
जमाना जिसको ना माने,
आज कुछ ऐसा कर जाओचुरा लो सांस तुम मेरी,
मेरे हर लब्ज ले जाओ
कोई सुने तो बस रो दे,
गीत कुछ ऐसा तुम गाओचले जाओ वहाँ पर तुम,
जहाँ मीलों तक कोई ना हो
फिर जब मन गवाही दे,
मुझे भी साथ ले जाओकरो फिर स्पर्श तुम मुझको,
मेरे बालों को सहलाओ
बढ़ा कर प्यास तुम मेरी,
मेरे अंतर को छु जाओनसों में सांस भर जाओ,
मधुर एहसास भर जाओ
जो मर कर भी ना मैं भूलूँ,
कुछ ऐसा खास कर जाओ
एक उम्र
मुझे चलना है एक उम्र मेरे साथ तुम चलोगे क्या
गिर जाऊं अगर सफर में मुझे सहारा देकर उठाओगे
तंग आ गया हूं खुद से मुझे अपने जैसा बनाओगे
मैंने कहानी लिखी है आंसुओं से मेरी कहानी तुम सुनोगे क्या
मुझे चलना है एक उम्र मेरे साथ तुम चलोगे क्यासच्ची मोहब्बत की ख्वाहिश है कुछ और नहीं चाहिए
मुझे पसंद है खामोशी ज्यादा शोर नहीं चाहिए
मेरे पास तुम्हारे सिवा कुछ और नहीं
तुम खुद को मेरे नाम करोगे क्या
मुझे चलना है एक उम्र मेरे साथ तुम चलोगे क्याकभी मन करे तुम्हारा तो मेरा मजाक बना लेना
कभी रूठ जाऊं मैं मुझे मुस्कुराकर मना लेना
मुझे जरूरत है तुम्हारी मेरा सहारा तुम बनोगे क्या
मुझे चलना है एक उम्र मेरे साथ तुम चलोगे क्यामुझे लिखना है तुम्हें मेरी नई ग़ज़ल बनोगे क्या
मुझे चलना है एक उम्र मेरे साथ तुम चलोगे क्या
कुछ कहना था, तुने सुना ही नहीं।
कुछ कहना था,
तुने सुना ही नहीं।हाथ बढ़ाया तो था,
तुने थामा ही नहीं।तेरे संग चलना था,
तु रुका ही नहीं।तेरे खातिर ही तो हमने अपने रास्ते बदले थे ना,
पर तुने तो देखा तक नहीं।तेरे साथ ही तो चाहा था अपना नाम जोड़ना,
पर तु तो मेरा कभी था ही नहीं।।💔
कोई महफ़िल नहीं है, कोई यार नहीं है
कोई महफ़िल नहीं है, कोई यार नहीं है,
कैसा दौर है कि मेरे साथ मेरे दिलदार नहीं है।मत घबरा ऐ दिल, है ये दौर कुछ वक़्त का,
हमेशा के लिए तो तू भी मेहमान नहीं है।वक़्त बदल देता है हर आलम और हालात,
हमेशा तो कभी गम की बरसात नहीं है।आयेगी तेरे बेपरवाह होकर जीने की रातें भी,
बस समझ ले अभी तेरे लिए कुछ आराम नहीं है।देखें है ऐसे वक़्त तूने पहले भी जिंदगी में बहुत,
इस वक़्त को बिताना तेरे लिए इक इम्तहान नहीं है।तेरे लिये सोच रखे होंगे कुछ बेपनाह खुशनुमा लम्हें,
ऊपरवाले के ख्यालों में बस गम के हालात नहीं है।
बची हर सांस गिनता हूँ, तेरी साँसों में ठहरा हूँ
बची हर सांस गिनता हूँ, तेरी साँसों में ठहरा हूँ,
दबी हर बात सुनता हूँ, तेरी बातों सा गहरा हूँ ।ज़माने से न भागा हूं, ज़माने में ही उतरा हूँ,
तेरे राज़ों को रख दिल में, ज़मी पर आज बिखरा हूँ।दिलों में जख्म है ढेरों, कई है दर्द के किस्से,
बची है अब ज़फा तेरी, उसी से बस मैं तेरा हूँ।यही बस सोचता हूँ मैं कि ये अब राज़ है कैसा?
मैं सोचूँ ये ही बस दिनभर, मैं तेरा हूँ या मेरा हूँ!मैं जो भी दर्द लिखता हूँ उसे तू रोज़ गाती है,
कभी ना दूर तुझसे हूँ लबों का गीत तेरा हूँ।ये कैसी बेरुखी तेरी जो अब तक दूर तू मुझसे,
ये मेरे दिल की हमदर्दी, मैं अब भी अक्स तेरा हूं।ये दरवाज़े भले ही बंद कर लेना तेरे दिल के,
मगर ये याद रखना तुम ,इसी पट का मै पहरा हूँ।ये मेरा और तेरा दिल फ़लक पर ही चमकता था,
मैं अब टूटा सितारा हूँ ज़मी पर आज ठहरा हूँ।मैं तारा हूँ तेरे दिल का मुकम्मल आसमां तू है,
मुकम्मल दिल हवेली है, फ़क़त उसका मैं कमरा हूँ।तू पूरा है समंदर सुन तू पूरा आसमां भी है,
बची छोटी ज़मी तेरी ,बचा उसका मैं ज़र्रा हूँ।मैं अब आवाज़ दूं तुझको , ये हिम्मत ना बची मुझमें
फसा हूँ ज़ख्म में इतने, लबो का बोल ठहरा हूँ।
किसी का सहारा ना बन के
किसी का सहारा ना बन के …
साथ दे पाओ तो बेहतर है ..
उजाले में तो सभी मिलते हैं गले …
अंधेरों में हाथ दे पाओ तो बेहतर है .
कुछ लोगों को नहीं है दरकार..
किसी कीमती तोहफे की यहां…
इस भागती दौड़ती दुनिया में..
तुम उन्हें अपने कीमती वक़्त की …
ज़रा सी सौगात दे पाओ तो बेहतर है ..
कुछ खामोशियों में छुपी होती हैं कई बातें..
हंसते हुए चेहरों के पीछे कई दर्द पलते हैं ..
यूं तो मुमकिन नहीं है हर दिल को समझ पाना यहां ..
तुम समझने की कुछ कोशिश भी कर पाओ तो बेहतर है ..
एहसास चेहरे पे थी प्यारी सी मुस्कुराहट मासूमियत से आबाद साज जब देखा उसे मैं पहली बार तब हुआ मुझे ये एहसास…
फूलों सी खिलती आयी यूँ चलती
खड़ी हुई वो मेरे पास
जब मिला उसे मैं पहली बार
तब हुआ मुझे ये एहसास…होंठो से निकली वो मधुर अल्फाज
कुछ तो बात थी उनमें खास
जब सुना उन्हें मैं पहली बार
तब हुआ मुझे ये एहसास…धड़कनें तेज़ी से बढ़ने लगी
खोने लगे मेरे होशो आवाज
मैंने जब पूछा तो दिल ने कहा
जनाब! मोहब्बत है ये एहसास…
समन्दर का पानी शराब होता तो सोचो कितना बवाल होता
समन्दर का पानी शराब होता तो
सोचो कितना बवाल होता,
हक़ीक़त, ख़्वाब होते तो सोचो
कितना बवाल होता…किसी के दिल में क्या छुपा हैं ये
बस ख़ुदा ही जानता है,
दिल अगर बेनक़ाब होते तो सोचो
कितना बवाल होता…थी ख़ामोशी हमारी फ़ितरत में तभी
तो बरसो निभाई लोगों से,
अगर मुँह में हमारे जवाब होते तो
सोचो कितना बवाल होता…हम तो अच्छे थे पर लोगों की
नजर में हमेशा बुरे ही रहें,
कहीं हम सच में बुरे होते तो सोचो
कितना बवाल होता…
कभी लगता है इस जिन्दगी में
कभी लगता है इस जिन्दगी में खुशियां बेशुमार है,
तो कभी लगने लगता है जिन्दगी ही बेकार है।कभी लगता है लोगो में बहुत प्यार है,
तो कभी लगता है रिश्तों में सिर्फ दरार है ।कभी लगता है हम भी जिन्दगी जीने के लिए बेकरार है ,
तो कभी कभी लगता है सिर्फ हमे मौत का इंतजार है ।कभी लगता है हमको भी उनसे प्यार है,
तो कभी लगता है सिर्फ प्यार का बुखार है।कभी लगता है शायद उनको भी हमसे इजहार है,
फिर लगता है हम दोनों में तो सिर्फ तकरार है ।कभी लगता है सब अपने ही यार है,
फिर लगता है इनमें भी छिपे गद्दार है ।कभी लगता है कितना प्यारा संसार है ,
तो कभी लगता है ये संसार बस संसार है ।
तू जिंदगी को जी
तू जिंदगी को जी
उसे समझने की कोशिश न करसुंदर सपनो के ताने बाने बुन
उसमे उलझन की कोशिश न करचलते वक्त के साथ तु भी चल
उसमें सिमटने की कोशिश न करअपने हाथो को फैला, खुल कर साँस ले
अंदर ही अंदर घुटने की कोशिश न करमन में चल रहे युद्ध को विराम दे
खामख्वाह खुद से लड़ने की कोशिश न करकुछ बाते भगवान पर छोड़ दे
सब कुछ खुद सुलझाने की कोशिश न करजो मिल गया उसी में खुश रह
जो सूकून छीन ले वो पाने कोशिश न कररास्ते की सुंदरता का लुफ्त उठा
मंजिल पर जल्दी पहुचने की कोशिश न कर।
जब तक चलेगी जिंदगी
जब तक चलेगी जिंदगी की सांसे,
कहीं प्यार कहीं टकराव मिलेगा।
कहीं बनेंगे संबंध अंतर्मन से तो,
कहीं आत्मीयता का अभाव मिलेगा
कहीं मिलेगी जिंदगी में प्रशंसा तो,
कहीं नाराजगियों का बहाव मिलेगा
कहीं मिलेगी सच्चे मन से दुआ तो,
कहीं भावनाओं में दुर्भाव मिलेगा।
कहीं बनेंगे पराए रिश्तें भी अपने तो
कहीं अपनों से ही खिंचाव मिलेगा।
कहीं होगी खुशामदें चेहरे पर तो,
कहीं पीठ पे बुराई का घाव मिलेगा।
तू चलाचल राही अपने कर्मपथ पे,
जैसा तेरा भाव वैसा प्रभाव मिलेगा।
रख स्वभाव में शुद्धता का ‘स्पर्श’ तू,
अवश्य जिंदगी का पड़ाव मिलेगा
अजीब सी कशमकश है
अजीब सी कशमकश है जिंदगी की
आज क्या है और कल क्या हो जाएगी!एक पल में बदल जाती है जिंदगी यहां
जो है राहें वो कल कहां नजर आयेंगी!धुंधला धुंधला सा है शमा आज यहां
जो लम्हा है संग वो भी गुजर जायेगा!पर थोड़ी उम्मीद तो अभी बाकी है।
कि ये जीवन मेरा भी संभल जाएगा!कभी कोई तो होगा मेरा भी जीवन में
जो यहां मेरा सिर्फ मेरा कहलाएगा!सहारा बनेगा मेरा वो इस जीवन में
मेरी जिंदगी में भी वो लम्हा आयेगा!
Mother's Day Poetry in Hindi — माँ पर कविताएँ
माँ के लिए लफ़्ज़ कम पड़ जाते हैं। नीचे कुछ ऐसी कविताएँ हैं जो माँ के प्यार, त्याग और उस रिश्ते को बयां करती हैं जिसका कोई मोल नहीं।
मदर डे की सुबह, मेरी बेटी ने सुंदर कार्ड थमाया बोली प्यार से यूं मां
मदर डे
मदर डे की सुबह, मेरी बेटी ने सुंदर कार्ड थमाया
बोली प्यार से यूं मां, खास आपके लिये बनाया
देख नन्ही कलाकारी , मेरा मन हर्षाया
उसमें उडेला प्यार देख, मेरा मन भर आया
उसी लम्हा, अपनी मां का चेहरा याद आया
मदर डे के बारे ओर जानने को, उनको फोन घुमाया
पूछा मां, क्या कभी आपने भी मदर डे मनाया?
हंस के बोली मेरी मां, था तब ऐसा ज़माना कहाँ
मदर डे मनाने की किसको फुरसत मिलती थी
एक को पाला, एक को जन्मा, यूं ही जिंदगी चलती थी
मदर डे, चिल्ड्रन डे, आजकल के चोंचले
देखने हो सही मायने प्यार के, तो झांको चिड़ियों के घौंसले
क्या हुआ तन है छोटा, पर बड़े हैं हौंसले
उनका हर दिन लेबर-डे, हर रात मदर- डे होती है
दू-दूर से तिनके लाकर, अपना आशियां संजोती है
दाना-दाना मुंह में डाल, बच्चों का पेट भरती है
फिर ओर भोजन की तलाश में, नई उड़ानें भरती है।
शाम से पहले घर को लौटे, यूं फर्ज अदा करती है।
कोई डे मनाना हो, तो छोड़िये बेकार के ताम- झाम
अपना समय और धन लगाओ, किसी नेक काम
मदर डे को ढकिऐ, किसी अधनंगी मां का तन
चिल्ड्रन डे मनाओ, दे के भूखे बच्चों को अन्न
लेबर- डे को मत दुखाओ, किसी गरीब का मन
ऐसे करके आप करेंगे, एक फंथ दो काज़
एक आपका चोंचला हो जायेगा, दूजा बनेगा सुखी समाज
गिर-गिर उठते रहना सीख हिंदी कविता
अच्छा है चुप रहना सीख।
लेकिन सच भी कहना सीख
झूठ दूर तक कब चलता है।
कड़वा सच भी सहना सीख।
हवा के संग बहता जाता है।
अपने पाँव पर रहना सीख।
दिल पत्थर ही ना बन जाये।
आँसू बन कर बहना सीख।
अगर मर्ज़ से रहना है तो।
किसी के दिल में रहना सीख
झूठी शान में जीवन खोया।
अब जिल्लत में रहना सीख।
हार जीत सब बेमानी है।
गिर-गिर उठते रहना सीख।।
चाहता तो तुम्हे रोक भी लेता, पर तुम तो बस एक खयाल थी
मैं चाहता तो तुम्हे रोक भी लेता, पर तुम तो बस एक खयाल थी,
तुम्हे ढूंढ लेता मैं शायद खुदमे,पर तुम तो खुद पर सवाल थी।
किस तरह देखता चेहरा फिर से तुम्हारा
किस तरह पाता अब सहारा तुम्हारा,
किस मोड़ पर तुम्हारी राह देखता,
किस तरह से तुम्हारी आह देखता।
सोचता तुम्हें तो सोचता कैसे,
रोकता तुम्हे तो रोकता कैसे?
मिल रहा था तुम्हारी परछाई से काफी था,
मिल रहा था हमारी तन्हाई से काफी था,
अब किस रास्ते मे ढूँढू तुमको बताओ ना,
याद आती है तुम्हारी जान, वापस आजाओ ना।
एक बार बस एक बार!
मुझे मुझसे मिलवा दो,
तुम्हारे बिना आती ही नही,
मुझे मेरी नींद लौटा दो,
आओ न मुझे याद आती है तुम्हारी,
खुशबू तुम्हारे बाद भी आती है तुम्हारी।
शायद! शायद! कुछ किस्सा तुम्हारा मुझमे बाकी है,
शायद! शायद! इक किस्सा तुम्हारा मुझमें बाकी है।
मुझे अब भी तुमसे मुहब्बत है,
मुझे अब भी तुम्हारी आदत है,
अब दुनिया से कोई गिला नही मुझे,
तुम्हें भी तो मुझसे शिकायत है।
काश! काश! कोई काश हमारे बीच न आता,
काश कोई काश मुझे रात भर ना सताता!
शायद तब हम हम होते,
शायद तब कुछ गम कम होते।
अपना इश्क़ भी एक दिल मुकम्मल होगा कविता
मैं समेट कर तेरी पसंद का हर सामान लाया हूँ
खुदा से मांग कर तेरे सपनों का जहान लाया हूंबड़ी ख़्वाहिश थी तुम्हें एक चमकते सितारे की
देख मैं झोले में भर के, पूरा आसमान लाया हूंमैं क्या जानूं, कौन सा फूल पसंद आए तुमको
एक फूल के बदले, मैं पूरा गुलिस्तान लाया हूंकि पास रहूं मैं तुम्हारे, यूं तुमसे दूर रह कर भी
मैं तोहफ़े में मोहब्बत का ऐसा निशान लाया हूंइक रोज होगी पूरी, हमारे भी इश्क़ की कहानी
पर-आज लिख के,बस अधूरी दास्तान लाया हूं।
साथ कुछ पल ही सही, निभाने तो आ कविता
साथ कुछ पल ही सही, निभाने तो आ…
दिल लगाने न सही, दुखाने तो आ।सुना है दर्द ने तुझसे, राहत माँगी है…
हँसाने न सही, रुलाने तो आ !तुझे मोहब्बत हो गई है, किसी और से मेरे मोहल्ले में..
दिल मुझसे न सही, उसी से लगाने तो आ !मिज़ाज बदल के बातें, मुझसे करती हो क्यों…
मुझसे जी भर गया है, ये बताने तो आ !कब तलक झूठी मोहब्बत को, पनाह देती रहोगी…
घर की छोड़ मेरे, अपना बसाने तो आ !तुझे न मुझसे, न मेरी मोहब्बत से, सुकूं मिलता है..
खुशी किसमें है तेरी, ये बताने तो आ!!
रिश्ते और ज़िंदगी पर कविताएँ — Life & Relationships
ज़िंदगी रिश्तों से बनती है — माँ-बाप, भाई-बहन, बचपन के वो दिन। नीचे कुछ ऐसी कविताएँ हैं जो इन्हीं अनमोल रिश्तों और बीते पलों को बयां करती हैं।
पिता एक उम्मीद है, एक आस है परिवार की हिम्मत और विश्वास है,
पिता एक उम्मीद है, एक आस है
परिवार की हिम्मत और विश्वास है,
बाहर से सख्त अंदर से नर्म है।
उसके दिल में दफन कई मर्म हैं।पिता संघर्ष की आंधियों में हौसलों की दीवार है
परेशानियों से लड़ने को दो धारी तलवार है,
बचपन में खुश करने वाला खिलौना है
नींद लगे तो पेट पर सुलाने वाला बिछौना है।पिता जिम्मेवारियों से लदी गाड़ी का सारथी है
सबको बराबर का हक़ दिलाता यही एक महारथी है
सपनों को पूरा करने में लगने वाली जान है
इसी से तो माँ और बच्चों की पहचान है।पिता ज़मीर है पिता जागीर है
जिसके पास ये है वह सबसे अमीर है,
कहने को सब ऊपर वाला देता है
पर खुदा का ही एक रूप पिता का शरीर है।
बड़े होकर भाई बहन कितने दूर हो जाते हैं
बड़े होकर भाई बहन कितने दूर हो जाते हैं |
इतने व्यस्त हैं सभीं, कि मिलने से मज़बूर हो जाते हैं|एक दिन भी जिनके बिना नहीं रह सकते थे हम,
सब ज़िन्दगी मे अपने, मसरूफ हो जाते हैं |
छोटी-छोटी बात बताए बिना हम रह नही पाते थे |
अब बड़े-बड़े मुश्किलो से हम अकेले जूझते जाते हैं।ऐसा भी नही की उनकी एहमियत नही हैं कोई,
पर अपनी तकलीफ़े जाने क्यूँ उनसे छिपाते हैं
रिश्ते नए, ज़िन्दगी से जुड़ते चले जाते हैं,
और बचपन के ये रिश्ते कहीं दूर हो जाते है
खेल खेल मे रूठना मनाना रोज़ रोज़ की बात थी
अब छोटी सी गलतफैमी दिलो को दूर कर जाती हैं।सब अपनी उलझनो मे उलझ कर रह जाते हैं|
कैसे बताए उन्हे हम, वो हमे कितना याँद आते हैं।
वो जिन्हे एक पल भी हम भूल नही पाते हैं।।
जरूरी नहीं हर रिश्ता प्यार का ही हो
जरूरी नहीं हर रिश्ता प्यार का ही हो
कुछ रिश्ते अपनेपन और एहसास के भी होते हैं।
जरूरी नहीं हर रिश्ते में जीत या हार हो
कुछ रिश्ते समर्पण के भी होते हैं।
जरूरी नहीं हर रिश्ते में कुछ पाना या खोना ही हो
कुछ रिश्ते त्याग के भी होते हैं।
जरुरी नहीं हर रिश्ता पास रहकर ही निभाना हो
कुछ रिश्ते दूर रहकर भी निभाने होते हैं।
जरूरी सहीं हर रिश्ते का आधार आपस में एक दूसरे से कुछ लेना देना ही हो
कुछ रिश्ते बिना स्वार्थ, बिना लेन देन के भी होते हैं
हर रिश्ते की अपनी खूबसूरती और जज्बात है।
बस ये जानकर ही उन्हें निभाने होते हैं…..
एक बचपन का जमाना था

एक बचपन का जमाना था,
जिस में खुशियों का खजाना था
चाहत चाँद को पाने की थी,
पर दिल तितली का दिवाना था..
खबर ना थी कुछ सुबहा की,
ना शाम का ठिकाना था..
थक कर आना स्कूल से,
पर खेलने भी जाना था…
माँ की कहानी थी,
परीयों का फसाना था..
बारीश में कागज की नाव थी,
हर मौसम सुहाना था..
रोने की वजह ना थी,
ना हँसने का बहाना था..
क्युँ हो गऐ हम इतने बडे,
इससे अच्छा तो वो बचपन का जमाना था..
वो बचपन का जमाना था..
उठ जाता हूं..भोर से पहले.. सपने सुहाने नही आते
उठ जाता हूं..भोर से पहले.. सपने सुहाने नही आते…
अब मुझे स्कूल न जाने वाले…बहाने बनाने नही आते..कभी पा लेते थे..घर से निकलते ही..मंजिल को..
अब मीलों सफर करके भी…ठिकाने नही आते…मुंह चिढाती है..खाली जेब. महीने के आखिर में,.
अब बचपन की तरह..गुल्लक में पैसे बचाने नही आते..यूं तो रखते हैं..बहुत से लोग..पलको पर मुझे..
मगर बेमतलब बचपन की तरह गोदी उठाने नही आते..माना कि.जिम्मेदारियों की..बेड़ियों में जकड़ा हूं..
क्यूं बचपन की तरह छुड़वाने..वो दोस्त पुराने नही आते..बहला रहा हूं बस दिल को बच्चों की तरह.
मैं जानता हूं.फिर वापस बीते हुए जमाने नही आते!
आख़िर में
कविता सिर्फ़ शब्द नहीं होती। एक अच्छी लाइन किसी का पूरा दिन बदल सकती है — किसी को सुकून दे सकती है, किसी की वो बात कह सकती है जो वो ख़ुद नहीं कह पाता।
यहाँ प्यार, दर्द, ज़िंदगी और रिश्तों — हर एहसास पर कविताएँ एक जगह हैं। जो पसंद आए, उसे डाउनलोड करें, अपनों के साथ शेयर करें। और अगर आप ख़ुद लिखते हैं, तो शुरुआत बस एक सच्चे एहसास से करें।
पढ़ते रहिए, महसूस करते रहिए।